प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) के अनुसार, इस वर्ष पहले चरण में देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री से सम्मानित 58 हस्तियों में तगा राम भील भी शामिल रहे। इसी समारोह में दो पद्म विभूषण और छह पद्म भूषण भी प्रदान किए गए।
तगा राम भील जैसलमेर जिले के भील जनजातीय समुदाय से आते हैं और राजस्थान के अलगोजा वादन परंपरा के वरिष्ठतम कलाकारों में गिने जाते हैं। अलगोजा पश्चिमी राजस्थान, सिंध और पंजाब की लोक परंपरा से जुड़ा जुड़वाँ बाँसुरी जैसा पारंपरिक वाद्ययंत्र है। अमर उजाला और द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने सात वर्ष की आयु में मवेशी चराते हुए इस वाद्ययंत्र को बजाना सीखा था।
बीते तीन दशकों से अधिक समय से वे भील जनजातीय लोक संगीत परंपरा के संवाहक माने जाते हैं। वे अपने वाद्ययंत्र स्वयं बनाते भी हैं — एक ऐसा कौशल जो आज भारतीय लोक परंपराओं में दुर्लभ होता जा रहा है।
राजस्थान के तीन पद्मश्री प्राप्तकर्ताओं में शामिल
इस वर्ष राजस्थान से तीन हस्तियों को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है। इनमें तगा राम भील के साथ मेवात क्षेत्र के भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी और श्रीगंगानगर के स्वामी ब्रह्मदेव महाराज शामिल हैं। स्वामी ब्रह्मदेव महाराज को दृष्टि एवं श्रवण बाधित बच्चों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में योगदान हेतु सम्मानित किया गया।
जनवरी में जारी केंद्रीय गृह मंत्रालय की अधिसूचना में तगा राम भील का नाम "कला" श्रेणी के अंतर्गत "जनजातीय लोक संस्कृति" में योगदान के लिए सूचीबद्ध किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने फ्रांस, अमेरिका, जापान और रूस जैसे देशों में आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में प्रस्तुतियाँ दी हैं और थार की संगीत परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाया है।
राष्ट्रपति भवन में समारोह
प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति मुर्मू ने उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में ये सम्मान प्रदान किए। वर्ष 2026 के लिए भारत सरकार ने कुल 131 पद्म पुरस्कारों को मंज़ूरी दी है — पाँच पद्म विभूषण, 13 पद्म भूषण और 113 पद्मश्री। शेष पुरस्कार दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह में प्रदान किए जाएँगे, ऐसा PTI को सूत्रों के हवाले से बताया गया है।
इसी समारोह में दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र को मरणोपरांत पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया, जिसे उनकी पत्नी एवं भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने ग्रहण किया।
लोक परंपरा के लिए महत्व
सांस्कृतिक टिप्पणीकारों का मानना है कि तगा राम भील और गफरुद्दीन मेवाती जोगी जैसे कलाकारों को मिला यह सम्मान ऐसे समय में आया है जब कई पारंपरिक वाद्ययंत्र और मौखिक परंपराएँ नई पीढ़ी तक पहुँचने की चुनौती का सामना कर रही हैं। यह भारत की अमूर्त लोक विरासत के प्रति संस्थागत मान्यता का संकेत है।
राजस्थान के राजनीतिक नेतृत्व की ओर से इस सम्मान को न केवल एक कलाकार की उपलब्धि, बल्कि राज्य के व्यापक लोक संगीत परिवेश की पहचान बताया गया है।
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