बाड़मेर, राजस्थान: बाड़मेर जिला मुख्यालय पर मंगलवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई जब शिव विधानसभा क्षेत्र के विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कलक्ट्रेट परिसर के भीतर अचानक खुद पर पेट्रोल छिड़क लिया। यह घटना उस समय हुई जब वे गिरल लिग्नाइट खदान के स्थानीय मजदूरों के समर्थन में आयोजित एक विशाल प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और समर्थकों ने तत्काल हस्तक्षेप कर विधायक को और कोई कदम उठाने से रोका तथा स्थिति को काबू में किया।

यह घटना बाड़मेर जिले की गिरल माइंस में कार्यरत स्थानीय मजदूरों के उस आंदोलन की पृष्ठभूमि में हुई, जो पिछले 38 दिनों से लगातार जारी है। मजदूरों की मुख्य मांगों में ठेका प्रथा की समाप्ति, नियमित रोजगार, उचित मजदूरी और बेहतर कार्यस्थल सुरक्षा शामिल हैं। विधायक भाटी स्वयं पिछले 14 दिनों से इस भीषण गर्मी में मजदूरों के साथ धरने पर बैठे थे।

"मजदूर किसी भी प्रदेश और व्यवस्था की रीढ़ होते हैं। उनकी मांगों को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना जाना चाहिए। पिछले 38 दिनों से मजदूर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज मांगों के लिए लड़ रहे हैं और मैं खुद 14 दिनों से उनके साथ इस भीषण गर्मी में धरने पर बैठा हूँ — फिर भी प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई।"
— विधायक रविंद्र सिंह भाटी, बाड़मेर कलक्ट्रेट, मंगलवार

घटना से पहले मंगलवार की सुबह गिरल गांव में एक विशाल मजदूर महापंचायत का आयोजन किया गया था। इस जनसभा में राजस्थान के विभिन्न हिस्सों से आए श्रमिक, किसान, युवा और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में शामिल हुए। महापंचायत की समाप्ति के बाद विधायक भाटी के नेतृत्व में हजारों मजदूर सैकड़ों वाहनों के काफिले में सवार होकर हाथों में तख्तियां और बैनर लिए बाड़मेर कलक्ट्रेट की ओर रवाना हुए।

कलक्ट्रेट पहुंचकर प्रदर्शनकारियों ने जिला मुख्यालय का घेराव कर दिया। इसी दौरान आक्रोश चरम पर पहुंचा और विधायक ने अचानक पेट्रोल की बोतल निकालकर खुद पर उड़ेल ली। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार इस घटना ने परिसर में तुरंत भगदड़ मचा दी। पुलिस और समर्थकों ने मिलकर विधायक को रोका और स्थिति को संभाला। भाटी ने इस कदम के लिए सीधे जिला प्रशासन और राज्य सरकार के "अड़ियल रवैये" को जिम्मेदार ठहराया।

घटना के बाद बाड़मेर कलक्ट्रेट परिसर को भारी पुलिस बल के साथ छावनी में तब्दील कर दिया गया। जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और विधायक तथा मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता शुरू की। परिसर के बाहर हजारों समर्थक और ग्रामीण डटे रहे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते रहे।

उल्लेखनीय है कि गिरल माइंस पश्चिमी राजस्थान के थार क्षेत्र में लिग्नाइट कोयले का एक प्रमुख स्रोत है, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय मजदूर कार्यरत हैं। इन मजदूरों की मांगें लंबे समय से लंबित बताई जा रही हैं और जिला तथा राज्य स्तर पर बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद समाधान नहीं निकला।

समाचार लिखे जाने तक प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता जारी थी। राजस्थान सरकार या कलक्ट्रेट की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। बाड़मेर जिला मुख्यालय पर स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई थी।